फिर आज दिल में ना जाना क्यों ये ख्वाइश हुई है
खुद टूटे थे पर फिर आज जिन्दगी की आजमाइश हुई है
सोचा था तुझे भुला के जिन्दगी को तन्हैयूओन में जियेंगे
पर फिर आज तेरे आणे की दस्तक हुई है
आशून ना आये थे जब तुम थे हमसे मूह मोर के
पर आणे की खुसबू से ये पलके आज भारी हुई
दिल मांगता था तुझे हमेसा पर तेरी याद में जीना सीख लिया था हमने
फिर क्यों आज फिर इस जिन्दा लाश में जिन्दगी पाणे की हसरात हुई है
जानते है हमे नही तेरी नफरत के भी काबिल
लेकिन हार सोच मुझे आज जाणे क्यों हावी हुई है
हर बार खुद को रोक लेते है हम आँखों और नजरे उमसे फेर लेतेये है हम
लगता है दिल में टसक उठी तेरे एक दीदार को ये आँखें तरस चुकी है
ना दर्द है ना आब ख़ुशी है ना जख्म है ना मरहम की रुई है
पर ना जाणे दिल को किस बात का जूनून है
सायद तेरे दीदार होंगे इस बात में वो मघ्रुम है
पता नही क्यों कैसे और किसके लिए लिख रहा हु
पर लगता है जैसे दिल का आंशुओं को कागज़ पे समेट रहा हु
जानता नही ये दिल आब किसे और क्या समझाएगा
पर ये जरुर है मेरा रास्ता आब तेरा घर hoke ना जाएगा
खुद को भूल चूका खुद से मर चूका हु
आब करना वो है जिसका बचा जूनून है मेरी चित्तः मेरा हर प़ल जलता खून है
आब यही मेरा लक्ष्य है
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