Friday, April 8, 2011

आज फिर टूटा हूँ


फिर आज दिल में ना जाना  क्यों ये ख्वाइश हुई है 
खुद  टूटे थे पर फिर आज जिन्दगी की आजमाइश हुई है

सोचा था  तुझे भुला के  जिन्दगी को तन्हैयूओन में जियेंगे
पर फिर आज तेरे आणे की दस्तक हुई है 

आशून ना आये थे जब तुम थे हमसे मूह मोर के 
पर  आणे की  खुसबू  से  ये  पलके  आज  भारी  हुई 

दिल  मांगता  था  तुझे  हमेसा  पर  तेरी  याद  में  जीना  सीख  लिया  था   हमने 
फिर  क्यों  आज  फिर   इस  जिन्दा  लाश  में  जिन्दगी  पाणे की  हसरात  हुई  है 

जानते  है  हमे  नही  तेरी  नफरत  के  भी  काबिल 
लेकिन  हार  सोच  मुझे  आज  जाणे  क्यों हावी  हुई  है 

हर  बार  खुद  को  रोक   लेते  है  हम  आँखों  और  नजरे  उमसे  फेर  लेतेये  है  हम 
लगता  है  दिल  में  टसक उठी  तेरे  एक  दीदार  को  ये  आँखें  तरस  चुकी  है 

ना  दर्द  है  ना  आब  ख़ुशी  है  ना  जख्म  है  ना  मरहम  की  रुई  है 
पर  ना  जाणे दिल  को  किस  बात  का  जूनून  है 
सायद  तेरे  दीदार  होंगे  इस  बात  में  वो  मघ्रुम  है 

पता  नही  क्यों  कैसे  और  किसके  लिए  लिख  रहा  हु 
पर  लगता  है   जैसे  दिल  का  आंशुओं   को  कागज़  पे  समेट रहा  हु 

जानता  नही  ये  दिल  आब  किसे  और  क्या  समझाएगा 
पर  ये  जरुर  है  मेरा  रास्ता  आब  तेरा  घर  hoke  ना  जाएगा 

खुद  को  भूल  चूका  खुद  से  मर चूका  हु 
आब  करना  वो  है  जिसका  बचा  जूनून  है  मेरी  चित्तः  मेरा  हर  प़ल  जलता  खून  है 

आब  यही  मेरा  लक्ष्य  है 
जिन्दगी  जीणे  का   यही  आब  करवा  सत्य  है



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