दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले
नई राहें नई हश्रातें
इनसे जुड़े जाने कितने शिकवे गीले
चलते है हम,मिलते है हम
डरते है क्यों जब मिलते है हम
दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले
दोस्त जो बने वो आगे बढ़ते चले
ताकते रहे राहें हम उनके लिए
जाने क्यों हम ये सोचते रहे
राहें मिले तो है जुड़ते चले
दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले
जिन्हें हम अपना कहे
उन्होंने है दर्द दिए
बहके है वो जो साथ चले
कल के दोस्त आज देख ना सके
दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले
नफरत की आग सब के दिल में जले
किनसे करे हम ये सिक्वे गिले
कोशिश है आग ये बुझे
दूस्तों के बीच दोस्ती रहें
दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले
सपना है ये
जो ना टूटे
दुनिया में कितनी हैं नफरतें
मिटाने इन्हें अब हम चले .... अब हम चले

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