Tuesday, September 4, 2012

HATE

दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले


नई राहें नई हश्रातें
इनसे जुड़े जाने कितने शिकवे गीले


चलते है हम,मिलते है हम
डरते है क्यों जब मिलते है हम


दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले

दोस्त जो बने वो आगे बढ़ते चले
ताकते रहे राहें हम उनके लिए


जाने क्यों हम ये सोचते रहे 
राहें मिले तो है जुड़ते चले 


दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले


जिन्हें हम अपना कहे
उन्होंने है दर्द दिए


बहके है वो जो साथ चले
कल के दोस्त आज देख ना सके


दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले


नफरत की आग सब के दिल में जले
किनसे करे हम ये सिक्वे गिले


कोशिश है आग ये बुझे
दूस्तों के बीच दोस्ती रहें


दुनिया में कितनी हैं नफरतें
पाने इन्हें अब हम चले


सपना है ये
जो ना टूटे


दुनिया में कितनी हैं नफरतें
मिटाने  इन्हें अब हम चले .... अब हम चले


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